कविता- जल की हर एक बूंद




मानसून आया, अपने संग बारिश लाया

अब सहेज लो जल की इन हर एक बूंद को

अन्यथा तरसोगे जल की बूंद-बूंद को


प्राणों के लिए अत्यंत जरूरी है जल

व्यर्थ में क्यों बहाते हो फिर इसे हर पल 

आज यदि नहीं सहेजी जल की हर एक बूंद

भावी पीढ़ी को कैसे मिल पाएगी जल की एक भी बूंद


पानी की चाह में धरती का सीना छलनी कर दिया 

यहीं वजह है की भूजल भी नीचे गिर गया 

अब जल त्रासदी का आगमन हो चूका है  

जान लो यह मान लो की जल है अमूल्य

सहेजनी होंगी इसकी हर एक बूंद


मिलकर करें सभी प्रयास

व्यर्थ न बहाए न बहाने दें जल

आने वाली पीढ़ी को दें इसका अनमोल उपहार

बूंद-बूंद सहज कर करों यह उपकार

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