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आपके पुण्य कार्य

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 दोस्त को मिल गई नौकरी साल 2012 में जब मैं इंदौर में अपनी पढ़ाई के लिए रह रहा था तब मेरे साथ मनावर स्कूल में पढ़े एक दोस्त की नौकरी का आदेश आया. उसे अपने मूल दस्तावेज का सत्यापन भोपाल जाकर करवाना था. इसलिए उसने मुझे साथ चलने को कहा. मैंने उसे साथ चलने के लिए हां कर दी. वह एक दिन पहले ही मेरे रूम पर इंदौर आ गया. जब मैंने उससे पूछा की क्या वह अपने सभी मूल दस्तावेज और उनकी छायाप्रति अपने साथ लाया है जो वहां दिखानी और जमा करनी है. उसने हाँ कह दिया. मैंने उससे आग्रह किया की वह एक बार फिर चेक लिस्ट से मिलान कर ले. इस बार भी उसने जवाब दिया की वह सारे दस्तावेज चेक लिस्ट से मिलान कर के ही लाया है इसलिए अब दोबारा जांचने की आवश्यकता नहीं नहीं है. मैंने फिर उसे कहा की वे अपने दस्तावेज मुझे दे जिससे की उन्हें मैं चेक कर दूं. उसने अपने सारे दस्तावेज मुझे सौंप दिए. मैंने चेक लिस्ट से जब मिलान किया तो पाया की उसमें अनुभव प्रमाण पत्र नहीं है. उसकी इस भूल के कारण अब वह निराश हो गया और भोपाल जाने से मना करने लगा. मैंने कहा वह ज्यादा टेंशन न ले और याद करें की अनुभव प्रमाण पत्र कहां रखा होगा. उसे फिर याद...

लघुकथा

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बारिश वाले  आंसू  किसान अत्यधिक चिंतित और परेशान थे क्योंकि कई दिनों से बारिश नहीं हो रही थी. किसान सूखे खेतों को देखते तो उनकी आँखों से बारिश की बूंदों की तरह आंसू निकलने लगते. अब दो चार दिनों की ही आस है अन्यथा बारिश नहीं हुई तो उन्हें अपनी फसल की दुबारा से बुआई करनी होंगी. इसलिए वें रूठे हुए वरुण देव को मनाने के लिए मिन्नते करने लगे व विभिन्न तरह के टोने टोटके करने लगे. संयोग से बारिश हो गई और वें सभी खुशी से झूम उठे. परंतु अब भी किसानों की आँखों में अश्रुधारा बह रही थी जो की बारिश होने की खुशी में थी.

कविता- जल की हर एक बूंद

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मानसून आया, अपने संग बारिश लाया अब सहेज लो जल की इन हर एक बूंद को अन्यथा तरसोगे जल की बूंद-बूंद को प्राणों के लिए अत्यंत जरूरी है जल व्यर्थ में क्यों बहाते हो फिर इसे हर पल  आज यदि नहीं सहेजी जल की हर एक बूंद भावी पीढ़ी को कैसे मिल पाएगी जल की एक भी बूंद पानी की चाह में धरती का सीना छलनी कर दिया  यहीं वजह है की भूजल भी नीचे गिर गया  अब जल त्रासदी का आगमन हो चूका है   जान लो यह मान लो की जल है अमूल्य सहेजनी होंगी इसकी हर एक बूंद मिलकर करें सभी प्रयास व्यर्थ न बहाए न बहाने दें जल आने वाली पीढ़ी को दें इसका अनमोल उपहार बूंद-बूंद सहज कर करों यह उपकार