जीवन में आनंद और उल्लास लातें है शिक्षक

 


मैं शुरू से ही पढ़ाई में औसत विद्यार्थी रहा हूँ. अपने माता-पिता व शिक्षकों के आशीर्वाद से जॉब भी कर रहा हूँ. चूंकि हर व्यक्ति की अपनी एक विशेष रुचि होती है, जिसके होने पर वह अपने आपको सबसे ज्यादा खुश महसूस करता है. इसी तरह मेरी भी बचपन से रुचि लेखन में रही है, किन्तु इसे मैं अपना प्रोफेशन नहीं बना पाया. हालांकि फिर भी में अपने खली समय में कुछ न कुछ लिखते रहना और अपने लेखन कौशल को बेहतर बना कर खुशी हासिल करने लगा.

मैं 100-200 शब्दों के छोटे छोटे आर्टिकल्स लिखता और उन्हें समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में प्रेषित कर देता. कुछ पत्रों का प्रकाशन भी हो जाता तो मैं उन्हें अपने शिक्षकों, मित्रों और प्रियजनों को दिखाता. 

एमएससी में मेरे प्रोफेशर रहे डॉ. विपुल कीर्ति शर्मा सर ने जब मेरे प्रकाशित पत्रों को पढ़ा तो उन्होंने मेरी प्रतिभा को और अधिक निखारने एवं बढ़ावा देने के लिए मुझे मोटिवेशन के साथ ही मार्गदर्शन भी दिया की मैं अब विज्ञान लेखन शुरू कर दूँ. सर ने विज्ञान की राष्ट्रीय पत्रिकाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराई जहाँ में अपने आलेख प्रेषित कर सकूं. सर के मार्गदर्शन से ही मेरे पत्र विज्ञान की फीचर्स पत्रिकाओं में प्रकाशित होने लगे. जिससे की अब मेरी नई पहचान विज्ञान लेखक के रूप में बनने लगी है.

यदि इस तरह के शिक्षक हर किसी को मिले तो उन्हें न सिर्फ तनाव या निराशा से मुक्ति मिलेगी बल्कि जब उनकी प्रतिभा सबके सामने आएगी तो वे आनंदित और उल्लास भरा जीवन जी सकेंगे. 


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