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Showing posts from August, 2021

हिंदी को अंतः मन से सहर्ष स्वीकार करें

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हिंदी एक प्रतिष्ठा की भाषा है क्योंकि यह सम्प्रेषण की सबसे सरल और सुशोभित भाषा है। यह सटीक रूप से श्रोता के दिलों दिमाक पर स्पष्ट रूप से पहुंच जाती हैं। किन्तु आज की नई पीढ़ी हिंदी से दूर हो रही है। इसका सबसे प्रमुख कारण कॉन्वेंट संस्कृति को माना जा सकता है। जहां धारा प्रवाह अंग्रेजी संभाषण ही मुख्य भूमिका में होता है। जबकि विदेश में हिंदी सही दिशा में आगे बढ़ रही है। विभिन्न देशों में हिंदी का सम्मान किया जा रहा है। कई विदेशी विश्वविद्यालयों में वहां के स्थानीय विद्यार्थी हिंदी सीख रहे है। विडंबना है की हमारे हिंदी भाषी राष्ट्र में अभिभावक स्वयं ही हिंदी को पिछड़ेपन की निशानी मान रहे है। हमें समझना होगा की बच्चे गीली मिटटी के समान होते है। बचपन में उनको जो सिखाया जाता है जीवनभर के लिए उनके मन मस्तिष्क पर वही वैचारिक पृष्ठभूमि बनी रहती है। आज हमें अपनी आत्मा और मन को जगाने की आवश्यकता है। हमें हिंदी के विशेष महत्व को नई पीढ़ी के मन में महसूस कराना होगा। हिंदी को भूलने के बजाय इसे अंतः मन से सहर्ष स्वीकार करके सम्मान देने से ही यह बच पायेगी अन्यथा नहीं।

जीवन में आनंद और उल्लास लातें है शिक्षक

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  मैं शुरू से ही पढ़ाई में औसत विद्यार्थी रहा हूँ. अपने माता-पिता व शिक्षकों के आशीर्वाद से जॉब भी कर रहा हूँ. चूंकि हर व्यक्ति की अपनी एक विशेष रुचि होती है, जिसके होने पर वह अपने आपको सबसे ज्यादा खुश महसूस करता है. इसी तरह मेरी भी बचपन से रुचि लेखन में रही है, किन्तु इसे मैं अपना प्रोफेशन नहीं बना पाया. हालांकि फिर भी में अपने खली समय में कुछ न कुछ लिखते रहना और अपने लेखन कौशल को बेहतर बना कर खुशी हासिल करने लगा. मैं 100-200 शब्दों के छोटे छोटे आर्टिकल्स लिखता और उन्हें समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में प्रेषित कर देता. कुछ पत्रों का प्रकाशन भी हो जाता तो मैं उन्हें अपने शिक्षकों, मित्रों और प्रियजनों को दिखाता.  एमएससी में मेरे प्रोफेशर रहे डॉ. विपुल कीर्ति शर्मा सर ने जब मेरे प्रकाशित पत्रों को पढ़ा तो उन्होंने मेरी प्रतिभा को और अधिक निखारने एवं बढ़ावा देने के लिए मुझे मोटिवेशन के साथ ही मार्गदर्शन भी दिया की मैं अब विज्ञान लेखन शुरू कर दूँ. सर ने विज्ञान की राष्ट्रीय पत्रिकाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराई जहाँ में अपने आलेख प्रेषित कर सकूं. सर के मार्गदर्शन से ही मेरे पत्र विज्ञान...

लघुकथा

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बारिश वाले  आंसू  किसान अत्यधिक चिंतित और परेशान थे क्योंकि कई दिनों से बारिश नहीं हो रही थी. किसान सूखे खेतों को देखते तो उनकी आँखों से बारिश की बूंदों की तरह आंसू निकलने लगते. अब दो चार दिनों की ही आस है अन्यथा बारिश नहीं हुई तो उन्हें अपनी फसल की दुबारा से बुआई करनी होंगी. इसलिए वें रूठे हुए वरुण देव को मनाने के लिए मिन्नते करने लगे व विभिन्न तरह के टोने टोटके करने लगे. संयोग से बारिश हो गई और वें सभी खुशी से झूम उठे. परंतु अब भी किसानों की आँखों में अश्रुधारा बह रही थी जो की बारिश होने की खुशी में थी.

कविता- जल की हर एक बूंद

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मानसून आया, अपने संग बारिश लाया अब सहेज लो जल की इन हर एक बूंद को अन्यथा तरसोगे जल की बूंद-बूंद को प्राणों के लिए अत्यंत जरूरी है जल व्यर्थ में क्यों बहाते हो फिर इसे हर पल  आज यदि नहीं सहेजी जल की हर एक बूंद भावी पीढ़ी को कैसे मिल पाएगी जल की एक भी बूंद पानी की चाह में धरती का सीना छलनी कर दिया  यहीं वजह है की भूजल भी नीचे गिर गया  अब जल त्रासदी का आगमन हो चूका है   जान लो यह मान लो की जल है अमूल्य सहेजनी होंगी इसकी हर एक बूंद मिलकर करें सभी प्रयास व्यर्थ न बहाए न बहाने दें जल आने वाली पीढ़ी को दें इसका अनमोल उपहार बूंद-बूंद सहज कर करों यह उपकार

मानवीय क्रियाकलापों से बढ़ी बाढ़ की तीव्रता और विध्वंसता

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बाढ़- बाढ़ एक ऐसी स्थिति है जिसमें कोई निश्चित भूभाग अस्थायी रूप से जलमग्न हो जाता है और इस वजह से वहां का जन-जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है। बाढ़ आने के कई कारण होते हैं और भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में उसका कारण भिन्न-भिन्न होता है। भारत में बाढ़ के कुछ प्रमुख कारणों में अधिक वर्षा , भूस्खलन , नदियों और नालियों के मार्ग अवरुद्ध होना इत्यादि है। ज्यादातर बाढ़ कुछ विशेष क्षेत्रों और वर्षा ऋतु में ही आती है। बाढ़ तब आती है जब नदी जल-वाहिकाओं में इनकी क्षमता से अधिक जल बहाव होता है और जल , बाढ़ के रूप में मैदान के निचले हिस्सों में भर जाता है। बाढ़ के मामले में भारत विश्व का दूसरा प्रभावित देश है। मानवीय क्रियाकलापों जैसे अंधाधुंध वनों की कटाई ,  प्राकृतिक अपवाह तंत्रों का अवरुद्ध होना तथा नदी तल और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मानवों के रहवास की वजह से बाढ़ की तीव्रता , परिमाण और विध्वंसता अत्यधिक बढ़ गई है। बाढ़ आने की मुख्य वजह- वर्तमान में देश की किसी भी नदी से डिसिल्टिंग यानी गाद हटाने का काम नहीं किया जाता है। पहले हमारे देश की ज्यादातर नदियां अविरल थीं। जिसकी वजह से बहती नदी में खुद ...