आपके पुण्य कार्य
दोस्त को मिल गई नौकरी साल 2012 में जब मैं इंदौर में अपनी पढ़ाई के लिए रह रहा था तब मेरे साथ मनावर स्कूल में पढ़े एक दोस्त की नौकरी का आदेश आया. उसे अपने मूल दस्तावेज का सत्यापन भोपाल जाकर करवाना था. इसलिए उसने मुझे साथ चलने को कहा. मैंने उसे साथ चलने के लिए हां कर दी. वह एक दिन पहले ही मेरे रूम पर इंदौर आ गया. जब मैंने उससे पूछा की क्या वह अपने सभी मूल दस्तावेज और उनकी छायाप्रति अपने साथ लाया है जो वहां दिखानी और जमा करनी है. उसने हाँ कह दिया. मैंने उससे आग्रह किया की वह एक बार फिर चेक लिस्ट से मिलान कर ले. इस बार भी उसने जवाब दिया की वह सारे दस्तावेज चेक लिस्ट से मिलान कर के ही लाया है इसलिए अब दोबारा जांचने की आवश्यकता नहीं नहीं है. मैंने फिर उसे कहा की वे अपने दस्तावेज मुझे दे जिससे की उन्हें मैं चेक कर दूं. उसने अपने सारे दस्तावेज मुझे सौंप दिए. मैंने चेक लिस्ट से जब मिलान किया तो पाया की उसमें अनुभव प्रमाण पत्र नहीं है. उसकी इस भूल के कारण अब वह निराश हो गया और भोपाल जाने से मना करने लगा. मैंने कहा वह ज्यादा टेंशन न ले और याद करें की अनुभव प्रमाण पत्र कहां रखा होगा. उसे फिर याद...